जाफराबादी भैंस (Jafarabadi Buffalo)

जाफराबादी भैंस
जाफराबादी भैंस

जाफराबादी भैंस (जिसे जाफराबादी, जाफरबादी या कभी-कभी गिर भैंस भी कहा जाता है) भारत की एक पालतू नदीय भैंस (riverine buffalo) नस्ल है, जिसका उद्गम गुजरात राज्य में हुआ है। यह भारत और पाकिस्तान दोनों देशों की एक महत्वपूर्ण दुग्ध नस्ल मानी जाती है। विश्व में अनुमानित रूप से लगभग 25,000 जाफराबादी भैंसें पाई जाती हैं।

यह नस्ल ब्राज़ील में निर्यात की जाने वाली पहली भैंस नस्ल थी और 2017 तक वहाँ पाई जाने वाली चार प्रमुख भैंस नस्लों में से एक है — अन्य तीन हैं मेडिटेरेनियन (Mediterranean), मुर्रा (Murrah) और स्वैम्प भैंस (Swamp Buffalo)


उत्पत्ति और इतिहास

जाफराबादी भैंस का नाम गुजरात के जाफराबाद क्षेत्र से लिया गया है, जहाँ यह नस्ल सर्वप्रथम पाई गई।
भारतीय राष्ट्रीय वैज्ञानिक प्रलेखन केंद्र (INSDC) के अनुसार, यह भैंस अफ्रीकी केप भैंस (African Cape Buffalo) और भारतीय जल भैंस (Indian Water Buffalo) के संकरण (hybrid) से उत्पन्न हुई है।

ऐतिहासिक अभिलेखों के अनुसार, ब्रिटिश शासनकाल में अफ्रीकी भैंसों को भारत में मांस उत्पादन के उद्देश्य से लाया गया था, जिसके बाद उनका स्थानीय जल भैंसों से प्रजनन हुआ। यही मिश्रण जाफराबादी भैंस के रूप में विकसित हुआ।
इस कारण से इस नस्ल के वीर्य की गुणवत्ता अपेक्षाकृत कमजोर बताई जाती है।


भौगोलिक वितरण

यह नस्ल मुख्य रूप से गुजरात के जाफराबाद, भावनगर, अमरेली, जूनागढ़ और गिर क्षेत्रों में पाई जाती है।
पाकिस्तान के सिंध और बलूचिस्तान क्षेत्रों में भी यह सीमित संख्या में पाई जाती है।
ब्राज़ील में इसे बड़े पैमाने पर दूध उत्पादन और मांस गुणवत्ता के लिए पाला जाता है।

भैंस के घी के लाभ

भैंस का देशी घी


शारीरिक विशेषताएँ

जाफराबादी भैंस अपनी विशाल काया और भारी सिर के लिए प्रसिद्ध है।

विशेषताविवरण
शरीर का आकारबड़ा, ठोस और गहरा शरीर, मजबूत हड्डी संरचना।
सिर (Head)भारी और चौड़ा सिर, माथा उभरा हुआ।
सींग (Horns)मोटे, चपटे और चौड़े सींग जो गर्दन के किनारों से नीचे की ओर झुकते हुए कानों के पास ऊपर की ओर उठते हैं।
त्वचा का रंगगहरा काला या भूरा-काला।
आँखेंबड़ी और चमकदार, जो इस नस्ल की विशेष पहचान हैं।
गर्दनछोटी और मजबूत।
थनबड़ा और गहरे आकार का, दूध दोहन के लिए उपयुक्त।

दूध उत्पादन

जाफराबादी भैंस एक मध्यम से उच्च दुग्ध उत्पादन वाली नस्ल है।
इसका दूध गाढ़ा, मलाईदार और वसा से भरपूर (fat-rich) होता है, जो घी, पनीर और मावा बनाने के लिए अत्यंत उपयुक्त माना जाता है।

  • औसत दैनिक दूध उत्पादन: 8–12 लीटर
  • औसत वसा प्रतिशत: 7–8.5%
  • औसत दुग्ध अवधि: 300–320 दिन

ब्राज़ील में यह नस्ल उच्च दूध गुणवत्ता और अनुकूल जलवायु सहनशीलता के कारण विशेष रूप से लोकप्रिय है।


विशेष जानकारी

  • जाफराबादी भैंसें गिर अभयारण्य (Gir Forest National Park) के समीप पाई जाती हैं और यह एशियाई शेरों (Asiatic Lions) का प्राकृतिक शिकार भी बनती हैं।
  • यह नस्ल गर्मी और आर्द्र वातावरण में अच्छी तरह अनुकूल हो जाती है।
  • अपने मजबूत शरीर के कारण यह खेतों में हल चलाने और गाड़ी खींचने जैसे कार्यों में भी प्रयुक्त होती रही है।

वैश्विक महत्व

जाफराबादी भैंस को भारत की निर्यातक नस्लों में अग्रणी स्थान प्राप्त है।
ब्राज़ील में 20वीं सदी की शुरुआत में इसे भारत से आयात किया गया, और आज यह वहाँ के चार प्रमुख भैंस नस्लों में शामिल है।
यह नस्ल भारत और पाकिस्तान दोनों देशों के दुग्ध उत्पादन उद्योग में भी महत्वपूर्ण योगदान देती है।


संदर्भ

  1. भारतीय राष्ट्रीय वैज्ञानिक प्रलेखन केंद्र (INSDC), “जाफराबादी नस्ल पर अध्ययन”, नई दिल्ली, 2002।
  2. पशुपालन एवं डेयरी विभाग, भारत सरकार — “भारतीय भैंस नस्लों की निर्देशिका” (2023)।
  3. खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO), “Buffalo Genetic Resources in Asia”, रोम, 2017।
  4. CIRB, हिसार — “Jafarabadi Buffalo Breed Characteristics Report”, 2020।
  5. Brazilian Buffalo Breeders Association, “Buffalo Breeds in Brazil”, 2017।

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