
पंढरपुरी भैंस महाराष्ट्र के परंपरागत दुग्ध-उत्पादक भैंसों में से एक स्वदेशी नस्ल है। यह नस्ल मुख्यतः पंधरपूर के आसपास विकसित हुई और अब इसके पारंपरिक प्रजनन क्षेत्र में सोलापूर, सांगली और कोल्हापुर जिले प्रमुख हैं। पंढरपुरी भैंसों को उनकी उत्कृष्ट प्रजनन क्षमता, गाढ़े वसा युक्त दूध और दूषण-प्रतिरोधी (drought-tolerant) गुणों के लिए जाना जाता है।
इतिहास और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि
पंढरपुरी भैंसें पारंपरिक रूप से स्थानीय गावली समुदाय द्वारा 150 से अधिक वर्षों से पाली जा रही हैं। कोल्हापुर के रितियों में इन भैंसों को पहलवानों को ताज़ा दूध देने के लिए शाही संरक्षण भी मिला हुआ था।
प्रजनन क्षेत्र (Breeding tract) और जलवायु
पंढरपुरी भैंसों का पारंपरिक प्रजनन इलाका मुख्यतः सोलापूर, सांगली और कोल्हापुर जिले हैं — जो अधिकांशतः सूखा-प्रवण (drought-prone) क्षेत्र हैं। इस क्षेत्र की मिट्टी काली, भूरे-लैटेराइटिक और लाल-लैटेराइटिक मिश्रित है।
- औसत तापमान: न्यूनतम ~9°C से अधिकतम ~42°C।
- औसत नमी: 43%–87%।
- वार्षिक वर्षा: सांगली में ~345.64 मिमी से लेकर कोल्हापुर में ~1168.96 मिमी तक।
- मुख्य वर्षा अवधि: मध्य मई से अक्टूबर अंत (मुख्यतः जून–सितंबर)।
- प्रमुख चारे/फसलें: ज्वार, मक्का, बाजरा, ओट, लौसीन/लुसीर्न, बरसीम इत्यादि।
भौतिक और रूपात्मक विशेषताएँ
- रंग: अधिकांशतः काला (≈86.51%) और कुछ भूरा/ब्राउन (≈13.14%)। चेहरे, पैरों और पूँछ पर सफेद धब्बे मिलते हैं।
- सींग: बहुत लंबे, पीछे की ओर, ऊपर की ओर मुड़े और बाहर की ओर घुमावदार; अक्सर रीढ़ तक पहुँचते प्रतीत होते हैं। स्थानीय रूप से चार प्रकार के सींगों के स्थानीय नाम प्रचलित हैं: टोकी (52.05%), भरकंद (34.24%), मेती (10.81%), और एकशिंग मेती (2.09%)। लगभग 49.92% में सींग की नोक ऊपर की ओर निर्देशित रहती है।
- माथा/चेहरा: माथा प्रायः उभरा हुआ (≈92.39%) और चेहरा लंबा व संकरा होता है; नासिका की हड्डी स्पष्ट होती है।
- पूँछ: छोटी, अक्सर सफेद स्विच (72.92% सफेद)।
- शरीर: मध्यम आकार का, कॉम्पैक्ट; बालों का रंग ग्रे/टैन/काला मिश्रित।
- थन: अधिकांश में ‘ट्रफ-उडर’ (trough udder) पाया जाता है (≈52–56%); ‘बाउल-उडर’ 34–36% में।
- थन-बिंदु (Teats): प्रमुख रूप से सिलिंड्रिकल प्रकार (≈47.87%), उसके बाद फ़नल और नाशपाती जैसे प्रकार।
वज़न और वृद्धि (Body weight & growth)
(केंद्रों — NARP, Gokul, Warana पर उपलब्ध डेटा का सार)
- जन्म पर औसत वजन: ~27.8 किग्रा (संलयन मान)
- 3 माह: ≈51.96 किग्रा
- 6 माह: ≈78.39 किग्रा
- 12 माह: ≈122.48 किग्रा
- 24 माह: ≈187.78 किग्रा
(डेटा: BR Ulmek तथा संबंधित केन्द्रों के नमूने; मान ± S.E के साथ प्रस्तुत होने पर स्रोतों का हवाला आवश्यक)
आकृतिक विशेषताएँ (Morphometrics)
| लक्षण | calves (≤6m) | young stock (6–24m) | bulls | milch buffaloes |
|---|---|---|---|---|
| शरीर की लंबाई (से.मी.) | 65.71 ±0.18 | 112.17 ±0.79 | 144.48 ±0.86 | 133.56 ±0.94 |
| कंधे की ऊँचाई (से.मी.) | 64.29 ±0.21 | 109.71 ±0.82 | 141.74 ±0.86 | 129.81 ±1.61 |
| छाती परिधि (से.मी.) | 79.86 ±0.35 | 152.40 ±0.86 | 205.41 ±2.31 | 183.52 ±1.53 |
(स्रोत: क्षेत्रीय केंद्रों के मापन; आंकड़े सारांश के रूप में)
दूध उत्पादन और लैक्टेशन पैरामीटर
(संसाधित औसत मान — Ulmek (2000), Vare (2001), Mane (2003), Khopade (2009) से उद्धृत)
- औसत लैक्टेशन अवधि: 255.60 ± 14.7 दिन
- औसत 305-दिन दूध उत्पादन: 1207.70 ± 13.4 किग्रा
- औसत दैनिक दूध उत्पादन: 4.90 ± 0.08 किग्रा
- औसत चरम/पीक दूध: (स्थानीय रिपोर्टों में भिन्न)
- औसत वसा प्रतिशत: 7.80 ± 0.07%
- औसत SNF: ≈ 9.40 ± 0.5
नोट: ये मान ग्रामीण/क्षेत्रीय प्रबंधन परिस्थितियों के अधीन मापे गए हैं; उचित प्रबंधन पर उत्पादन में वृद्धि संभव है।
प्रजनन (Reproduction) — समेकित आँकड़े
नर पक्ष (Male):
- पहली ट्रेनिंग: ≈ 34.28 माह
- पहली स्खलन (ejaculation): ≈ 37.63 माह
- पहली मेल (mating): ≈ 40.81 माह
मादा पक्ष (Female):
- यौवन की आयु: ≈ 30.59 माह
- पहली बछियाई (AFC): ≈ 43.82 माह
- सेवा अवधि (Service period): ≈ 97.92 दिन
- बछड़ा अंतराल (Calving interval): ≈ 407.05 दिन
- एस्ट्रस चक्र की लंबाई: ≈ 21.82 दिन
- एस्ट्रस अवधी: ≈ 39.67 घंटे
- गर्भधारण अवधि (Gestation): ≈ 310.02 दिन
(स्रोत: क्षेत्रीय सर्वेक्षण और शोध — Ulmek, Vare, Mane, Khopade)
पालन-पोषण, आवास और प्रबंधन
- पंढरपुरी भैंसें मुख्यतः दूध हेतु पाली जाती हैं; पुरुष पशु द Draught हेतु और पारंपरिक सांस्कृतिक बुल-लड़ाई में भी प्रयुक्त होते हैं।
- अधिकांश परिवारों का औसत परिवार आकार ≈ 5.49; पुरुष व महिला दोनों ही पशु देखभाल में सक्रिय।
- वॉलोइंग (wallowing) प्रायः दोपहर में कराई जाती है।
- पशु खरीद-बिक्री में पशु मेले प्रमुख हैं (~64.2%)।
- लगभग 94% परिवार दूध निकासी के दौरान स्वच्छता बनाए रखते हैं।
- प्रजनन विधि: प्राकृतिक सेवा ≈ 50%, कृत्रिम गर्भाधान (A.I.) ≈ 29.7%, तथा मिश्रित ≈ 20.3%।
आवास: लगभग 57.9% किसान अलग शेड प्रदान करते हैं; शेड खुले (54.4%) या बंद (45.6%) प्रकार के होते हैं। अधिकांश शेड कच्चे (kachha) बनाए जाते हैं; केवल ~30% पक्का आवास। शेड सामान्यतः वेंटिलेटेड और स्वच्छ रखे जाते हैं।
खुराक: सामान्य केंद्रित आहार में मूँगफली के केक, कपास बीज के केक तथा पेलेट/कम्पाउंड फीड शामिल हैं। हरे चारे हेतु गन्ना की टहनियाँ, मक्का, ज्वार आदि उपलब्ध कराए जाते हैं। बछड़ों (≤6 माह) को चराने के लिए नहीं भेजा जाता; उन्हें सुबह-शाम पोषक चारे और दूध दिया जाता है।
दूध विक्रय/वितरण: कुछ क्षेत्रों में कॉल-या-रोड साइड मिल्किंग (‘कट्टा’ प्रणाली) प्रचलित है — जहाँ भैंसों को एक सामूहिक स्थान पर मिल्क करके ताज़ा दूध ग्राहकों को उपलब्ध कराया जाता है; कुछ विक्रेता घर-घर जाकर भी दूध सप्लाई करते हैं।
आर्थिक व जैविक महत्व
पंढरपुरी भैंसें स्थानीय स्तर पर महत्त्वपूर्ण हैं क्योंकि वे स्थानीय पारिस्थितिक व कृषि प्रणालियों में अनुकूल हैं: मध्यम दूध उत्पादन, उच्च वसा प्रतिशत और सहनशीलता सूखे तथा गर्म मौसम के प्रति। इन्हें पारंपरिक ग्रामीण अर्थव्यवस्था में विस्तृत भूमिका के साथ देखा जाता है।
जटिलताएँ और संरक्षण संबंधी चुनौतियाँ
- नस्ल की शुद्धता बनाए रखने में कठिनाई — अज्ञात/ग्रेडेड संकरण और कृत्रिम गर्भाधान में उपलब्ध अन्य नस्लों (जैसे मुर्रा) के वीर्य के कारण।
- नस्लीय जनसंख्या में समग्र गिरावट का संकेत (विभिन्न राज्यों के सर्वेक्षणों के आधार पर)।
- संरक्षण हेतु लक्षित प्रजनन कार्यक्रम, स्थानीय शुद्ध बछड़ों का संरक्षण तथा क्षेत्रीय ब्रीडिंग नीतियाँ आवश्यक हैं।
संदर्भ (चयनित)
- BR Ulmek — Growth and body weight studies of Pandharpuri buffaloes at ZARS, Kolhapur (स्रोत तालिका आधारित)
- Ulmek (2000), Vare (2001), Mane (2003), Khopade (2009) — प्रजनन व उत्पादन संबंधी क्षेत्रीय अध्ययन।
- क्षेत्रीय कृषि और पशुपालन रिपोर्टें — Zonal Agricultural Research Stations (NARP – Kolhapur, Gokul, Warana) तथा महाराष्ट्र पशुपालन विभाग के सर्वे।