नागपुरी भैंस (Nagpuri Buffalo)

नागपुरी भैंस
नागपुरी भैंस

नागपुरी भैंस (Nagpuri Buffalo) महाराष्ट्र राज्य के विदर्भ क्षेत्र की एक बहुउपयोगी (dual-purpose) भैंस की नस्ल है, जो दूध उत्पादन और कृषि कार्य (द्राफ्ट शक्ति) दोनों में समान रूप से उपयोगी मानी जाती है। यह नस्ल अत्यधिक गर्म और शुष्क परिस्थितियों में भी दूध उत्पादन और प्रजनन क्षमता बनाए रखने के लिए प्रसिद्ध है। नागपुरी भैंस को “वरहाडी” (या बेरारी, एल्लीचपुरी, अचलपुरी) नामों से भी जाना जाता है, विशेषकर अकोला, अमरावती, बुलढाणा और यवतमाल जिलों में।


उत्पत्ति और वितरण

इस नस्ल का नाम नागपुर जिले से लिया गया है, जहाँ से इसका उद्गम हुआ। इसका पारंपरिक प्रजनन क्षेत्र (breeding tract) विदर्भ क्षेत्र में लगभग 41,105 वर्ग किलोमीटर में फैला है, जो अर्ध-शुष्क (semi-arid) है और जहाँ गर्मियों में तापमान 46–47°C तक पहुँच जाता है।

नागपुरी भैंसें मुख्यतः अमरावती जिले के एलीचपुर (अचलपुर), परतवाड़ा, दर्यापुर और अंजनगांव-सुरजी तहसीलों में पाई जाती हैं। इसके अतिरिक्त वर्धा जिले के अरवी तहसील, नागपुर जिले के हिंगना (दगमा, कवडस) और कटोल (कथलाबोडी, रोहणा) गाँवों में भी इनकी उपस्थिति देखी जाती है।
यवतमाल जिले के जामवाड़ी, कलंब, चापरदा, घोटी और जांब-बाज़ार गाँव इस नस्ल के प्रमुख केंद्र हैं।


सांस्कृतिक और सामाजिक महत्व

इस नस्ल को मुख्य रूप से नंद-गवली और गोसावी समुदायों के लोग पालते हैं। ये समुदाय स्वयं को भगवान श्रीकृष्ण के ग्वाल मित्रों के वंशज मानते हैं और परंपरागत रूप से केवल नागपुरी भैंसों का पालन करते हैं। ये किसान आमतौर पर दूरदराज़ गाँवों में रहते हैं और अपने छोटे खेतों में सीमित संसाधनों के साथ पशुपालन करते हैं।


महाराष्ट्र में नस्लों का वितरण

महाराष्ट्र में तीन प्रमुख स्वदेशी भैंस नस्लें हैं — नागपुरी, पंधरपुरी और मराठवाड़ी। इसके अतिरिक्त पूर्णाथडी, तंबाटी, गवलगन और शिनगली जैसी स्थानीय किस्में भी हैं, जिन्हें अभी औपचारिक नस्ल का दर्जा नहीं मिला है।

पशुधन जनगणना (2007) के अनुसार, महाराष्ट्र में कुल 63.03 लाख भैंसों में से लगभग 25.16% स्वदेशी नस्लों की हैं:

  • नागपुरी – 2.11%
  • पंधरपुरी – 4.17%
  • मराठवाड़ी – 2.90%
    बाकी 74.84% भैंसें अवर्णित (non-descript) हैं।

नस्ल जनसंख्या में परिवर्तन

वर्षजनसंख्या (%)वार्षिक परिवर्तन दर
19976.96%
20033.76%-9.14%
20072.11%-13.69%

हालाँकि राज्य में कुल भैंसों की संख्या प्रति वर्ष 0.75% की दर से बढ़ रही है, फिर भी नागपुरी, पंधरपुरी और मराठवाड़ी जैसी शुद्ध नस्लों की आबादी क्रमशः (-)13.69%, (-)11.24% और (-)11.38% की दर से घट रही है (स्रोत: सिरोथिया आदि, 2004)।

विदर्भ में मुर्रा नस्ल की लोकप्रियता बढ़ने से किसानों का झुकाव अधिक दूध देने वाली नस्लों की ओर हुआ है, जिससे नागपुरी भैंस जैसी उच्च वसा वाली नस्लें संकट में हैं।


नस्ल शुद्धता और संरक्षण प्रयास

नागपुरी नस्ल की शुद्धता घटने का एक प्रमुख कारण है शुद्ध नरों (बैल) की कमी। पशुपालन विभाग के कृत्रिम गर्भाधान केंद्रों (A.I. Centers) में प्रायः मुर्रा और सुर्ती नस्ल का वीर्य उपलब्ध होता है, जिससे नागपुरी भैंसों का आनुवंशिक क्षरण हुआ है।

महाराष्ट्र पशुधन विकास मंडल (MLDB) ने हाल ही में नंद-गवली समुदाय के किसानों से 12 शुद्ध नस्ल के नागपुरी बछड़ों की खरीद की है, जिन्हें टेलंखेड़ी, नागपुर स्थित बैल पालन केंद्र (BRC) में रखा गया है। इन्हें भविष्य के प्रजनन कार्यक्रमों में उपयोग किया जाएगा।


शारीरिक विशेषताएँ

विशेषताविवरण
रंगकाला (82.05%) या भूरा (17.5%) – चेहरे, पैरों और पूँछ पर सफेद धब्बे।
सींगलंबे, चौड़े, तल पर मोटे, तलवार जैसी आकृति में पीछे की ओर मुड़े हुए (नर: 54–55 से.मी., मादा: 61–62 से.मी.)।
शरीरमध्यम आकार का, मजबूत शरीर; भार: नर – 400 किग्रा, मादा – 375 किग्रा।
सिर और चेहरालंबा, शंक्वाकार चेहरा, सीधी नाक की हड्डी। माथे के सफेद धब्बों के आधार पर “अर्धचांद्री”, “चांद्री”, “गाल-भोंडी” और “कपाल-भोंडी” नामों से पहचाना जाता है।
गर्दनलंबी और बेलनाकार।
कानमध्यम आकार के, नुकीले सिरे वाले।
अंग (Limbs)लंबे और हल्के।
पूँछछोटी, अंत में सफेद बालों वाला गुच्छा (नर: 54–55 से.मी., मादा: 51–52 से.मी.)।

आकृति विज्ञान संबंधी आँकड़े (Morphological Characteristics)

लक्षणऔसत मान ± S.Eसंदर्भ
शरीर की लंबाई121.21 ± 0.46 से.मी.सिरोथिया आदि (2004)
कंधे की ऊँचाई123.62 ± 0.32 से.मी.सिरोथिया आदि (2004)
छाती की परिधि175.02 ± 0.53 से.मी.सिरोथिया आदि (2004)
वयस्क भारनर – 396.19 ± 12.76 किग्रा, मादा – 349.26 ± 2.01 किग्रासिरोथिया आदि (2004)

दुग्ध उत्पादन और प्रजनन प्रदर्शन

लक्षणऔसत मान ± S.Eसंदर्भ
औसत दुग्ध अवधि (दिन)303.26 ± 16.80सिरोथिया आदि (2004)
305-दिवसीय दुग्ध उत्पादन (किग्रा)1038.49 ± 39.56सिरोथिया आदि (2004)
औसत दैनिक दूध उत्पादन (किग्रा)5.15 ± 0.23सिरोथिया आदि (2004)
चरम दूध उत्पादन (किग्रा)7.14 ± 0.25सिरोथिया आदि (2004)
औसत वसा प्रतिशत8.21 ± 0.19सिरोथिया आदि (2004)

विशेषता: नागपुरी भैंस का दूध वसा की दृष्टि से अत्यधिक समृद्ध होता है और ग्रामीण इलाकों में घी और मावा बनाने में प्रयुक्त होता है।


प्रजनन विशेषताएँ (मादा)

लक्षणऔसत मानसंदर्भ
यौवन की आयु (दिनों में)1360.33सिरोथिया आदि (2004)
पहली बछियाई की आयु (दिनों में)1775.72 ± 38.83सिरोथिया आदि (2004)
सेवा अवधि (दिनों में)115.9 ± 1.08सिरोथिया आदि (2004)
सूखा काल (दिनों में)122.78 ± 7.34सिरोथिया आदि (2004)
बछड़ा अंतराल (दिनों में)426.44 ± 0.81सिरोथिया आदि (2004)

पालन-पोषण और आवास

विदर्भ क्षेत्र के अधिकांश किसान रात के समय भैंसों को बाँधते हैं और दिन में खुले स्थान पर रखते हैं।
लगभग 63% किसानों के पास अलग पशु घर हैं, जिनमें से 86% कच्चे (मिट्टी/खपरैल) प्रकार के हैं।


खुराक (Feeding)

इस क्षेत्र में किसान प्रायः 1–3 वयस्क भैंसें पालते हैं। ये भैंसें मुख्यतः चराई (grazing) पर निर्भर रहती हैं, और केवल दूध देने वाली भैंसों को थोड़ा बहुत चारा और चूर्ण (concentrates) दिया जाता है।
दूध उत्पादन घरेलू उपभोग के लिए ही किया जाता है।


कृषि-आर्थिक परिदृश्य

नागपुर, अकोला, अमरावती और यवतमाल जिलों के किसानों के पास औसतन 8.01 एकड़ भूमि (जिसमें से 4.38 एकड़ सिंचित) होती है।
इनकी वार्षिक औसत आय लगभग ₹70,600 (कटरिया आदि, 2007) बताई गई है।
अमरावती जिले में अधिक आय और बेहतर भैंस आबादी का कारण वहाँ की अनुकूल जलवायु और बेहतर मिट्टी की गुणवत्ता है।
यह क्षेत्र कपास उत्पादन के लिए प्रसिद्ध है; अन्य प्रमुख फसलें हैं ज्वार, मूँगफली, गेहूँ, मक्का, बाजरा और रागी


महत्व और संरक्षण

नागपुरी भैंस महाराष्ट्र की प्राचीन और अनुकूल नस्लों में से एक है, जो चरम तापमान और सीमित जल उपलब्धता में भी जीवित रहती है।
यह नस्ल न केवल दूध और घी की गुणवत्ता के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि स्थानीय आनुवंशिक संसाधन (genetic resource) के रूप में भी मूल्यवान मानी जाती है।


संदर्भ

  1. सिरोथिया, ए.आर., काले, डी.एस., और कांबले, एस.बी. – नागपुरी भैंस पर अध्ययन, महाराष्ट्र पशुपालन विभाग, 2004।
  2. महाराष्ट्र राज्य पशुधन विकास मंडल (MLDB), नागपुर, 2021।
  3. कटरिया आदि, सोशियो-इकनॉमिक स्टडी ऑफ नागपुरी बफ़ैलोज़ ब्रीडर्स इन विदर्भ रीजन, 2007।
  4. पशुपालन विभाग, महाराष्ट्र शासन — पशुधन जनगणना रिपोर्ट (2007)

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